मध्य पूर्व में जारी संघर्ष को छह महीने का समय बीत चुका है। इस लंबी और खर्चीली जंग की वजह से ईरान को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और उसके कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे तबाह हो गए हैं। इसके बावजूद, तेहरान सरकार पीछे हटने के बजाय पूरी मजबूती से डटी हुई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान के इस तरह टिके रहने के पीछे कई रणनीतिक वजहें हैं। लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध झेलने के कारण देश की अर्थव्यवस्था संकटपूर्ण परिस्थितियों में ढल चुकी है। इसके अलावा, ईरान का मजबूत सैन्य ढांचा और क्षेत्रीय सहयोगियों का नेटवर्क उसे लगातार रसद व सामरिक मदद पहुंचा रहा है, जिससे उसकी युद्ध क्षमता बनी हुई है।
हालांकि, इस लंबे टकराव ने आम नागरिकों का जीवन बेहद मुश्किल बना दिया है और देश के संसाधनों पर भारी दबाव डाला है। तबाही के बाद पुनर्निर्माण की चुनौती भी बहुत बड़ी है। इसके बावजूद, राजनीतिक और सैन्य स्तर पर ईरान का नेतृत्व इस संघर्ष को लंबा खींचने में सक्षम दिख रहा है, जो वैश्विक शांति के लिए चिंता का विषय है।
स्रोत: द जीकेपी टाइम्स

