द जीकेपी टाइम्स, गोरखपुर: उत्तर प्रदेश एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इंडिया (UPASI) का बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय शल्य चिकित्सा सम्मेलन 'UPASICON-2026' इस बार गोरखपुर में आयोजित होने जा रहा है। एम्स गोरखपुर में 26 से 29 नवंबर 2026 तक चलने वाले इस चार दिवसीय महासम्मेलन में उत्तर प्रदेश समेत देशभर से बड़ी संख्या में दिग्गज सर्जन, विशेषज्ञ चिकित्सक और शोधकर्ता जुटेंगे। इस दौरान आधुनिक शल्य चिकित्सा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर गहन मंथन किया जाएगा।
शनिवार को प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में UPASICON-2026 के आयोजन सचिव डॉ. शिव शंकर शाही (डायरेक्टर, शाही ग्लोबल हॉस्पिटल) ने तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चिकित्सा विज्ञान में हो रहे तेजी से बदलावों के बीच सर्जनों का नई तकनीकों से अपडेट रहना बेहद जरूरी है। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य आधुनिक शल्य चिकित्सा के नवीनतम शोध और उपचार पद्धतियों को डॉक्टरों तक पहुंचाना है, जिससे मरीजों को इसका सीधा लाभ मिल सके।
26 नवंबर को हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग, 27 से 29 तक वैज्ञानिक सत्र
सम्मेलन के पहले दिन 26 नवंबर को विशेष 'हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग' कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें नए और अनुभवी सर्जनों को आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें मुख्य रूप से निम्न तकनीकों पर जोर रहेगा:
- रोबोटिक और लेजर सर्जरी
- चिकित्सा क्षेत्र में AI का व्यावहारिक उपयोग
- एंडोस्कोपिक और लैप्रोस्कोपिक तकनीक
- रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (Radiofrequency Ablation)
इसके पश्चात 27 से 29 नवंबर तक आयोजित विभिन्न वैज्ञानिक सत्रों में देशभर से आए विशेषज्ञ अपने शोध निष्कर्ष और अनुभव साझा करेंगे।
आम मरीजों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाना मुख्य उद्देश्य
आयोजकों के अनुसार, आने वाले समय में AI और रोबोटिक्स सर्जरी के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले हैं। इस महासम्मेलन का अंतिम लक्ष्य इन अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से आम मरीजों को सुरक्षित, सुलभ और किफायती उपचार उपलब्ध कराना है।
चिकित्सा हब के रूप में उभरता गोरखपुर
आगरा (2024) और कानपुर (2025) के बाद अब गोरखपुर को इस भव्य आयोजन की मेजबानी मिलना शहर की बढ़ती चिकित्सीय क्षमता का प्रमाण है। एम्स गोरखपुर (आयोजन अध्यक्ष: डॉ. गौरव गुप्ता, विभागाध्यक्ष, सर्जरी विभाग) सहित स्थानीय स्वास्थ्य संस्थानों के विस्तार से अब मरीजों को जटिल ऑपरेशनों के लिए दिल्ली, मुंबई या लखनऊ नहीं जाना पड़ता।
कला, संस्कृति और टेराकोटा को मिलेगा राष्ट्रीय मंच
चिकित्सा संगोष्ठी के साथ-साथ सम्मेलन परिसर में पूर्वांचल की कला, संस्कृति, हस्तशिल्प, टेराकोटा और गीता प्रेस के उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। आयोजकों ने स्थानीय कारोबारियों और समाज के विभिन्न वर्गों से स्टॉल के माध्यम से अपनी कला व उत्पादों को प्रदर्शित करने की अपील की है।




