पं रामकृष्ण द्विवेदी पूर्व प्रत्याशी लोकसभा 62 नें की जीवनी को विस्तार से समझया
गोरखपुर। समाजवाद और लोकतंत्र के महानायक भारत रत्न जयप्रकाश नारायण जी की 124वीं जयंती के अवसर पर गोरखपुर शहर के असुरन चौराहे स्थित उनकी प्रतिमा पर फूल माला चढ़कर सद्दाम सुमन अर्पित किए जयप्रकाश जी का संपूर्ण जीवन आजादी के पहले एवं आजादी के बाद समाजवाद को ऊंचाई तक ले जाने और जनता के पीड़ा को समझते हुए अपने आंदोलन की धार को कभी धीमा होने नहीं दिया वास्तविक लोकतंत्र की पहचान वह होती है जिसमें समाज के प्रत्येक तबके क्यों उच्चतम जीवन बसर करने का अवसर मिले और देश की जनता खुशहाली से जीवन व्यतीत करें यही समाजवाद है उन्होंने आजादी के पहले और आजादी के बाद देश के जनता की आवाज को पहचाना और उनके उन्नयन के लिए हर संभव प्रयत्न किया जिसमें छात्र आंदोलन से लेकर के भूदान आंदोलन ग्राम आंदोलन और लोकतंत्र में अधिनियम को खत्म करने का पूर्ण प्रयास किया और 1977 में केंद्र में गैर कांग्रेस सरकार की स्थापना के साथ ही देश में अधिनायक वाद को खत्म किया और खुशहाली लाने का प्रयास किया जिसे आम जनता के जीवन को सुधारा जा सके एवं समाज के प्रत्येक तपके को समान अवसर प्राप्त हो जयप्रकाश जी संपूर्ण क्रांति के जनक थे वह सरकार बदलने के खिलाफ नहीं बल्कि समाज की व्यवस्था के परिवर्तन के पक्ष में थे उन्होंने संपूर्ण क्रांति में राजनीतिक क्रांति सामाजिक क्रांति आर्थिक क्रांति सांस्कृतिक क्रांति बौद्धिक क्रांति शैक्षणिक क्रांति एवं नैतिक तथा आध्यात्मिक क्रांति के मूल्यों को सजोना चाहते थे जिससे मानव समाज खुशहाल बने और प्रत्येक व्यक्ति की खुशहाली उसके चेहरे से परिलक्षित हो वह कहा करते थे जात-पात तोड़ दो तिलक दहेज छोड़ दो समाज के प्रवाह को नई दिशा में मोड़ दो राष्ट्रपिता बापू के जाने के बाद अहिंसा और अहिंसा युक्त समाज बनाना जयप्रकाश जी की प्राथमिकता में रहा है उनके जीवन में हिंसा का कोई स्थान नहीं रहा है गुजरात के छात्र आंदोलन में बुलावे के बाद जयप्रकाश जी नें यह शर्त रखी थी कि छात्र किसी भी रूप में हिंसा में सम्मिलित नहीं रहेंगे और ना ही किसी दलीय राजनीति के शिकार हो इस के लिए वह कटिबंध रहे हैं चाहे गुजरात का नवनिर्माण छात्र आंदोलन रहा हो या पटना के छात्रों का आंदोलन समाजवाद के अजेय योध्या अब हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी क्रांति की मिसाल आज भी भारतीय लोकतंत्र को प्रेरित करते रहती है। संपूर्ण क्रांति अब नारा है भावी इतिहास हमारा है जयप्रकाश जी जय समाजवाद।




