गोरखपुर
300 साल पुरानी सनातन धरोहर बदहाली के कगार पर
✍️ नन्हेंलाल यादव 🕒 10 अगस्त 2026 3 व्यूज़

राजपरिवार के उत्तराधिकारी ने संभाला जिर्णोद्धार का बीड़ा
गोरखपुर।चिल्लूपार विधानसभा की करीब 300 वर्ष पुरानी सनातन आस्था की धरोहर श्री ठाकुर राघवेंद्र स्वामी मंदिर बदहाली के दौर से गुजर रहा है। गोला नगर पंचायत क्षेत्र के बिसरा स्थित इस प्राचीन मंदिर की जर्जर होती दीवारें और जीर्ण-शीर्ण स्थिति संरक्षण की ओर जिम्मेदारों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। बताया जाता है कि मंदिर का संबंध राजपरिवार की पीढ़ियों पुरानी परंपरा से रहा है। महारानी हरिपाल कुवरी प्रथम इसकी उत्तराधिकारी रही हैं। वर्तमान में राजपरिवार की विरासत से जुड़े समाजसेवी ताम्रध्वज बहादुर चंद्र उर्फ भैया जी अपने निजी सहयोग से मंदिर की सनातन परंपरा और धरोहर को बचाने के लिए जीर्णोद्धार का प्रयास कर रहे हैं। मंदिर की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब एक व्यक्ति अपनी सामर्थ्य से करीब तीन शताब्दी पुरानी विरासत को बचाने का प्रयास कर सकता है, तो प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस दिशा में पहल क्यों नहीं कर सकते? चुनाव के दौरान विकास के मुद्दे प्रमुख रहते हैं, लेकिन ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहरों का संरक्षण प्राथमिकता में क्यों नहीं दिखाई देता? मंदिर की जर्जर दीवारें आज सिर्फ ईंट-पत्थर की हालत नहीं, बल्कि उस इतिहास की गवाही दे रही हैं जिसे कई पीढ़ियों ने संभालकर रखा है। सवाल यह है कि क्या इस विरासत को बचाने का पूरा भार किसी एक व्यक्ति के कंधों पर छोड़ दिया जाएगा।स्थानीय लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से प्राचीन मंदिर के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार के लिए ठोस पहल की मांग की है। क्योंकि करीब तीन सौ वर्षों की विरासत यदि मिट गई, तो उसे दोबारा इतिहास में लौटाना संभव नहीं होगा।

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